Sharad Pawar on Vice President election मामला क्या है?
Sharad Pawar on Vice President election राजनीति में हर चुनाव एक नए समीकरण की शुरुआत करता है। इस बार मामला उपराष्ट्रपति पद का है। बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के रूप में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन का नाम आगे बढ़ाया। वहीं विपक्षी इंडिया गठबंधन ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर एकजुटता का संदेश दिया।
बीजेपी चाहती थी कि क्षेत्रीय दलों और खासकर शरद पवार का समर्थन मिले ताकि चुनाव में ताकत बढ़े। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पवार को फोन कर समर्थन की अपील भी की। लेकिन पवार ने साफ कर दिया – “हमारा समर्थन इंडिया गठबंधन के साथ है।”
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Sharad Pawar on Vice President election शरद पवार का साफ संदेश
“विचार मेल नहीं खाते”
पवार ने साफ कहा कि राधाकृष्णन उनके विचारों से मेल नहीं खाते। उनका कहना है कि ऐसे नेताओं को उपराष्ट्रपति पद देना सही नहीं होगा जिन्होंने सत्ता का दुरुपयोग किया हो।
फडणवीस की फोन कॉल और पवार का जवाब
मुख्यमंत्री फडणवीस ने खुद फोन करके राधाकृष्णन को समर्थन देने की गुजारिश की थी। लेकिन पवार ने यह प्रस्ताव ठुकराते हुए साफ कर दिया कि वे केवल इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।
केवल इंडिया गठबंधन को समर्थन
पवार ने यह भी कहा कि विपक्ष का मकसद लोकतंत्र को बचाना है, इसलिए सभी दलों को मिलकर बीजेपी का मुकाबला करना होगा।
झारखंड का विवाद और राधाकृष्णन की भूमिका
हेमंत सोरेन की राजभवन में गिरफ्तारी
पवार ने याद दिलाया कि जब राधाकृष्णन झारखंड के राज्यपाल थे, तब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राजभवन के अंदर ही ED ने गिरफ्तार किया।
राज्यपाल की भूमिका पर सवाल
सोरेन ने निवेदन किया था कि गिरफ्तारी उनके घर या दफ्तर में की जाए, लेकिन उन्हें राजभवन में ही गिरफ्तार किया गया। पवार का आरोप है कि यह राज्यपाल की सहमति से हुआ।
सत्ता का दुरुपयोग का आरोप
पवार ने कहा कि यह घटना सत्ता के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण है। ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद देना उचित नहीं होगा।
Sharad Pawar on Vice President election बिहार में राहुल गांधी को मिला बड़ा समर्थन
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
पवार ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कई मामलों में पक्षपाती रवैया अपनाता है। दिल्ली में इस मुद्दे पर 300 सांसदों ने धरना भी दिया।
विपक्ष का प्रदर्शन और गिरफ्तारियां
विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्होंने विरोध जारी रखा।
बिहार की राजनीतिक जागरूकता
राहुल गांधी के हालिया दौरों को बिहार की जनता का भारी समर्थन मिला। पवार ने इसे बिहार की राजनीतिक चेतना का प्रमाण बताया।
Sharad Pawar on Vice President election मतदाता सूची में गड़बड़ियों के आरोप
शिरूर मतदारसंघ में 27 हजार डुप्लीकेट वोट
शिरूर में एक ही घर नंबर पर 188 वोट दर्ज मिले। कुल मिलाकर 27,000 फर्जी वोटों की पहचान हुई।
हडपसर में 43 हजार फर्जी वोटिंग
हडपसर में 43,000 लोगों ने गलत तरीके से वोट डाला। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया।
खडकवासला में EVM गड़बड़ी का मामला
खडकवासला में वोटिंग मशीन से जुड़ी तकनीकी खामियों का मामला सामने आया। लगातार दूसरी बार वोट डालने पर VVPAT पर्ची नहीं मिल रही थी।
विपक्ष का दावा – लोकतंत्र खतरे में?
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध हो गई है। फर्जी वोटिंग और EVM गड़बड़ी के मामलों से आम जनता का भरोसा टूट रहा है। विपक्ष ने इस मुद्दे को हाईकोर्ट तक ले जाने का ऐलान किया है।
निष्कर्ष – पवार की राजनीति का असर कितना गहरा?
शरद पवार के इस रुख से साफ है कि वे बीजेपी को समर्थन देने के मूड में नहीं हैं। उनकी राजनीति हमेशा सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ रही है। राधाकृष्णन के मामले में उन्होंने विपक्ष की एकजुटता को मजबूत किया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव में यह समीकरण क्या रंग लाता है।
FAQ’s:
1.Sharad Pawar on Vice President election शरद पवार ने राधाकृष्णन को समर्थन क्यों नहीं दिया?
क्योंकि पवार का मानना है कि राधाकृष्णन ने झारखंड में सत्ता का दुरुपयोग किया और वे उनके विचारों से मेल नहीं खाते।
2. इंडिया गठबंधन का उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार कौन है?
इंडिया गठबंधन ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है।
3. Sharad Pawar on Vice President election झारखंड विवाद में राधाकृष्णन पर क्या आरोप है?
हेमंत सोरेन को राजभवन में गिरफ्तार किया गया, जिसे राधाकृष्णन रोक सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
4. Sharad Pawar on Vice President election शिरूर और हडपसर में कितने फर्जी वोट पाए गए?
शिरूर में लगभग 27,000 डुप्लीकेट वोट, जबकि हडपसर में 43,000 फर्जी वोटिंग हुई।
5.Sharad Pawar on Vice President election बिहार में राहुल गांधी को इतना समर्थन क्यों मिल रहा है?
क्योंकि बिहार की जनता राजनीतिक रूप से जागरूक है और वे चुनाव आयोग की गलतियों के खिलाफ राहुल गांधी के साथ खड़ी दिख रही है।
